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Sunday, January 17, 2016

बेटी बचाओ...


बेटी तो घर की शान होती है , 
बेटी से ही मुस्कान होती है ..
पर हर कोई ये समझता नहीं , 
तभी तो दुनिया बदनाम होती है ..

बेटी ही आँगन महकाए ;
बेटी ही माँ के पाँव दबाये ,
पर बेटे की चाह में अक्सर ; 
मा ए भी जल्लाद बन जाए ..

वैसे तो कहते है , 
बेटी ही बाप को प्यारी होती है ..
पर लोग यही मानते है,
बेटी तो बाप के सर पर भारी होती है .. 

बेटी को है शिक्षा दिलाना , 
अपने पेरो पे खड़ा हे करना ,
पर यही सोच हमारी है ;
बेटी को तो है चूल्हा ही जलाना ...

बेटा तो बहु को दान में हे लाये ,
पर बेटी तो कन्यादान का सौभाग्य दिलाये ..

अक्सर सुना है कहते है माबाप , 
सेवा तो बेटे को ही करनी है ..
पर बेटी को बेटा मान के मौका तो दो ,
फिर देखो वो तुम्हारे लिए क्या क्या करती है ..

बेटी ही शर्म का गहना है,
इसमें कोई संदेह नहीं ,
पर अगर हाथ में हथियार उठाले ,
तो किसी यौद्धा से भी कम नहीं ..

वैसे तो बेटी के बारे में हे दकियानुशी बाटे है कई ,
पर मत सुनो उन बातो को जो तुमसे गलत काम हे करवाती ..

बेटीओ पर बढ़ रहे हे अत्याचार हर साल ,
इसी वजह से हे अपने देश का बुरा हाल ...

अगर बदलना हे अपने देश का हाल ;
तो आज से....... ; बल्कि अभिसे ......., डंका बजाओ ..
और कहो सबसे की बेटी बचाओ .....

Tuesday, January 1, 2013

Amitabh Bachchan's poem for 'India's Daughter'




Actor Amitabh Bachchan wrote and recited a poem for the 23-year-old medical student who died in a Singapore hospital on 30 December 2012. He uploaded it on his official Facebook page.

Wednesday, June 20, 2012

माँ ममता त्याग तपस्या और बलिदान है !


माँ ममता त्याग तपस्या और बलिदान है !
माँ जिंदगी की किताब और अनंत ज्ञान है !!

माँ से सभ्यता संस्कृति और संस्कार है !
माँ से मानवता अपनत्व और संसार है !!

माँ है तो बचपन है स्कूल है हाँथ में दूध की कटोरी है !
माँ है तो ममता है दुलार है निदिया की लोरी है !!

माँ जीवन सवांरती है उसके असंख्य रूप होते है !
माँ जिनके साथ नहीं होती वो ममता के लिए रोते है !!

जबतक बच्चे घर नहीं आते माँ को नींद नहीं आती !
माँ सीने से लगाती है थपकी देकर सुलाती है !!

माँ बच्चो पर आती विपदा सहर्ष हर लेती है !
भूख गरीबी कुटिया में भी जीवन गुजार देती है !!

माँ मरियम फातिमा पन्नाधाय में नजर आती है !
माँ गीता बाईबल और कुरान में नजर आती है !!

इस भौतिकता की आभा में हम परछाई पकड़ने जाते है !
घर में बूढ़े माँ-बाप के लिए कुछ काम सौप के जाते है !!

वो सेवा वो सत्कार कहाँ अहंकार हमारी बाड़ी है !
हम माँ की ममता भूल चुके घर-घर की यही कहानी है !!

माँ के दूध का कर्ज चुकाया नहीं जा सकता !
माँ- बाप का स्थान दूसरा ले नहीं सकता !!

माँ-बाप के आशीषों से लोग जिंदगी की ऊँचाईया छूलेते है !
वो लोग अज्ञानी अहंकारी है जो माँ-बाप से मुंह मोड़ लेते है !!

माँ-बाप का सम्मान करो उन्हें असहनीय शब्द मत बोलो !
माँ-बाप के लिए ब्रिधा-आश्रम के नहीं अपने घर के दरवाजे खोलो !!

Monday, January 30, 2012

माँ की व्यथा




मेरी व्यथा
अनकही सही
अनजानी नहीं है
मुझ जैसी
हज़ारों नारियों की
कहानी यही है

जन्म से ही
खुद को
अबला जाना
जीवन के हर मोड़ पर
परिजनों ने ही
हेय माना

थी कितनी प्रफुल्लित मैं
उस अनूठे अहसास से
रच बस रहा था जब
एक नन्हा अस्तित्व
मेरी सांसों की तार में
प्रकृति के हर स्वर में
नया संगीत सुन रही थी
अपनी ही धुन में
न जाने कितने
स्वप्न बुन रही थी

लम्बी अमावस के बाद
पूर्णिमा का चाँद आया
एक नन्हीं सी कली ने
मेरे आंगन को सजाया

आए सभी मित्रगण, सम्बन्धी
कुछ के चहरे थे लटके
तो कुछ के नेत्रों में
आंसू थे अटके
भांति भांति से
सभी समझाते
कभी देते सांत्वना
तो कभी पीठ थपथपाते
कुछ ने तो दबे शब्दों में
यह भी कह डाला
घबराओ नहीं, खुलेगा कभी
तुम्हारी किस्मत का भी ताला

लुप्त हुआ गौरव
खो गया आनन्द
अनजानी पीड़ा से यह सोचकर
बोझिल हुआ मन
क्या हुआ अपराध
जो ये सब मुझे कोसते हैं
दबे शब्दों में
मन की कटुता में
मिश्री घोलते हैं

काश! ममता में होता साहस
माँ की व्यथा को शब्द मिल जाते
चीखकर मेरी नन्हीं कली का
सबसे परिचय यूँ कराते
न इसे हेय, न अबला जानो
'खिलने दो खुशबू पहचानो'

- दीपा जोशी
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